Darsha Amavasya on 31 Jul 2019

Jul 31, 2019 12:00 AM-Jul 31, 2019 11:59 PM
Darsha Amavasya – The day to do tharpan of ancestors
Amavasya or Amavasi is considered as the day when the moon is not visible in the sky. We can also say that Amavasya is the no moon night in Hindu tradition as per the lunar calendar. In the first quarter of the lunar month, this is said to be the first night. Although even today religious people debate on whether to call Amavasya an auspicious or inauspicious. Here we can thank our cinema where it is shown that all black magic and evil acts are performed on Amavasya. Earlier it was advised not to travel on an Amavasya night, as there is no moonlight and this could invite a danger.
 
Astrologers never advice people to perform any good work on this day, like the moon and important planets in Hindu astrology are not visible. No new ventures or important ceremonies are held on this day.

If we talk in symbolical terms, the period from Amavasya to Purnima can be considered as the gradual awakening and transcendence into the fullness. From darkness to the gradual realization of the Supreme Soul, what we say "Tamso ma jyotir gamay”.

In every part of India, the term ‘Amavasya’ is commonly used. In different states, it is called with different names and is b=observed in different months too. Like in Magh month is called ‘Mauni Amavasya’ and in Ashwin month it is called ‘Mahalya Amavasya’. In Tamil Nadu Amavasi in Aadi month has immense importance. In Kerala Amavasya in Karkidakam month has significance.

In Hindu Mythology, Darsha Amavasya holds great importance. On this auspicious day, Hindus do tharpan of dead ancestors. It is said that you get multiple benefits if you do fasting on this day. People do fasting dedicated to Chandrma or Moon.

The fast on this is observed with proper ritual and vidhi, which is as follows:
• In Hindu Mythology, Chandradev is considered the most important Navgrahas. He is known as the lord of emotions and nurture of plant and animal life.
• It is said that people who worship Chandra dev on this auspicious day gain good fortune and prosperity in their lives.
• It reduces delays and reversals in life.
• Worshiping Moon on this day can help one gain spiritual sensitivity
• This day is associated with wisdom, purity and good intentions.
• Worshiping forefathers (known as Pitra in Sanskrit) on this day is considered as the most important part of the day. 
• Many worships to achieve Moksha (completing the circle of life and death) and also attain their wishes and blessings for a good fortune.

The fasting on Darsha Amavasya starts on the morning of Amavasya Thiti and lasts only after sighting the moon on the Chandra darshan the next day.

The Shradh ceremonies performed to the ancestors on this day can clear the sins and pitra dosh and can win the blessings of the ancestors for the health and happiness of the family members. Many worships to achieve Moksha (completing the circle of life and death).

हमारा हिंदुस्तान हमेशा से ही बहुत से पर्व और त्यौहारों के लिये प्रसिद्ध रहा है। और एक ऐसा ही पर्व है दर्श अमावस्या। अमावस्या या अमावसी को उस दिन के रूप में माना जाता है जब चंद आकाश में दिखाई नहीं देता है। हम यह भी कह सकते हैं कि हिंदू परंपरा में चंद्र कैलेंडर के अनुसार अमावस्या की रात चाँद नहीं दिखता है। चांद्र मास की पहली तिमाही मेंयह पहली रात कहलाती है। हालाँकि आज भी धार्मिक लोग इस बात पर बहस करते हैं कि अमावस्या को शुभ कहा जायें या अशुभ। यहाँ हम अपने सिनेमा का शुक्रिया अदा कर सकते हैं जहाँ यह दिखाया जाता है कि अमावस्या पर सभी काले जादू और बुरे काम किए जाते हैं। पहले यह सलाह दी जाती थी कि अमावस्या की रात्री को यात्रा न करें क्योंकि उस दिन चांदनी नहीं होती है और इस कारण यह खतरे को आमंत्रित करती है।

 

इस दिन ज्योतिषी लोगों को कोई भी शुभ कार्य करने की सलाह नहीं देते हैंक्योंकि हिंदू ज्योतिष में चंद्रमा और महत्वपूर्ण ग्रह दिखाई नहीं देते हैं। इसलिए इस दिन कोई नया  उद्यम या महत्वपूर्ण समारोह आयोजित नहीं करना चाहिए।

 

यदि हम प्रतीकात्मक शब्दों में बात करेंतो अमावस्या से पूर्णिमा तक की अवधि को यशक्रम जागृति और परिपूर्णता में श्रेष्ट माना जा सकता है। अंधेरे से लेकर सर्वोच्च आत्मा के क्रमिक अनुभूति तकजिसे हम "तमसो मा ज्योतिर्गमय" कहते हैं।

 

भारत के ज्यादातर हिस्से में 'अमावस्याशब्द का आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है। परन्तु विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से भी पुकारा जाता है साथ ही साथ अलग अलग महीनों में अलग अलग नाम से भी पुकारा जाता है। जैसे माघ महीने को 'मौनी अमावस्याकहा जाता है और आश्विन महीने में इसे 'महाकाल अमावस्या'कहा जाता है। तमिलनाडु में आदि महीने में अमावसी का अत्यधिक महत्व है। जबकि केरल में कार्किदकम महीने की अमावस्या का अधिक महत्व है।

 

हिन्दू पौराणिक कथाओं मेंदर्श अमावस्या बहुत महत्व मानी जाती है। इस शुभ दिनहिंदू मृत पूर्वजों का तर्पण (श्रृ्दा) करते हैं। यह कहा जाता है कि यदि आप इस दिन व्रत रखते हैं तो आपको कई लाभ मिलते हैं। लोग यह व्रत चंद्रमा या चंद्रमा को समर्पित करते हैं। इस दिन के पीछे एक पौराणिक कहानी है,जो इस प्रकार है:

 

दर्श अमावस्या कथा

प्राचीन काल में बारहसिंह आत्माएं थीं जो सोमरोस पर रहती थीं। एक बार बरिशदास ने गर्भ धारण किया और एक बच्ची को जन्म दिया जिसका नाम अछोदा था। वह दुखी रहती थी क्योंकि उसके पिता नहीं थे और परिणामस्वरूप वह पिता के प्यार की कामना करती थी। वह बहुत रोया करती थी।  पितृ लोक में आत्माओं ने उसे पृथ्वी पर राजा अमावसु की बेटी के रूप में जन्म लेने की सलाह दी। उसने उनकी सलाह पर अमल किया और राजा अमावसु की बेटी के रूप में जन्म लियाजो बहुत महान राजा था। अपनी इच्छा के अनुसार उसने अपने पिता का प्यार और देखभाल प्राप्त की और संतुष्ट महसूस किया। जैसे-जैसे उसकी इच्छा पूरी हुईउसने पित्रों को उनकी बहुमूल्य सलाह के लिए धन्यवाद देने का फैसला किया और इसलिए पितृ लोक के कैदियों के लिए पितृ पूजा की व्यवस्था कीजिसे श्राद्ध कहते है। श्राद्ध जिस दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता है उस दिन करते है और इस तरह उस दिन को अमावस के नाम से जाने लगें। तब से अमावस्या के दिन पूर्वजों को श्राद्ध अर्पित करने का रिवाज चलने लगा।

 

इस व्रत को बहूत अनुष्ठान और विधि के साथ मनाया जाता है -

  •  हिंदू रहस्यशास्त्र मेंचंद्रदेव को सबसे महत्वपूर्ण नवग्रह माना जाता है। उन्हें भावनाओं के स्वामी और पौधे और पशु जीवन के पोषण के रूप में जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस शुभ दिन पर चंद्र देव की पूजा करने वाले लोग अपने जीवन में सौभाग्य और समृद्धि प्राप्त होती है। 
  • यह जीवन में मुसीबतों को कम करता है।
  • इस दिन चंद्रमा की पूजा करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक संवेदनशीलता प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
  • यह दिन ज्ञानपवित्रता और नेक इरादों से जुड़ा है।
  • पूर्वजों (संस्कृत में पितृ के नाम से जाना जाता है) की पूजा करना का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
  • मोक्ष (जीवन और मृत्यु के चक्र को पूरा करने) को प्राप्त करने के लिए कई प्रकार की पूजा इस दिन की जाती है साथ ही साथ एक अच्छे भाग्य की इच्छा पूरी होती है। 

दर्श अमावस्या पर व्रत अमावस्या की तिथि सुबह से शुरू होती है और अगले दिन चन्द्र दर्शन के बाद चन्द्रमा के दर्शन के बाद ही समाप्त होती है। इस दिन पूर्वजों के लिए किए गए श्राद्धपापों और पितृ दोष को दूर करते हैं और परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य और खुशी के लिए पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मोक्ष (जीवन और मृत्यु के चक्र को पूरा करने) को प्राप्त करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण पूजा जाती है

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